आख़िर यूँ ही क्यूँ…

यूँ ही कह जायेगा कोई अपनी मनमानी समझ के यूँ ही सह जायेगा कोई अपनी क़िस्मत समझ के और आख़िर में… होगा भी तो होगा क्या यूँ ही मार देगा कोई ख़ुद को काल समझ के साथ ही… यूँ ही मर जायेगा कोई ख़ुद को मृत समझ के।।