शान्ति

मैं शान्ति से कुछ अल्फ़ाज़ व्यक्त करना चाहती हूँ चीख़-चीखकर हार गई हूँ मेरी कमी में कमी ढूँढना आदत हो गई होगी तुम्हारी शायद इसीलिए मज़बूत होकर थक गई हूँ मैंने सारी हिचक को एक दुपट्टे में बाँधकर ओढ़ लिया है मैंने आजकल कल में होकर रहना छोड़ दिया है फ़िलहाल मेरी कहानियों को छोड़ोContinue reading “शान्ति”