अजीब कहानी-तेरी ऐ ज़िंदगानी

मेरा जीवन भी कभी हरा-भरा हुआ करता था।वक़्त बदलते ही ये भी पतझड़ हो गया। मायूस चेहरा कभी हँसते-हँसते दुखता था।आज वो भी दुःख में ही बहता है। माथा सिकोड़कर नाराज़गी बयाँ कर जाती थी।आज कोने में सिकुड़कर बैठी रहती हूँ।मैं भी कभी ख़ुद को कलाकार समझती थी।आज कठपुतली बन गई हूँ। मैंने कभी नहींContinue reading “अजीब कहानी-तेरी ऐ ज़िंदगानी”