अल्फ़ाज़ बड़े या ज़ुबाँ

https://amzn.to/36kv3yT ये दिल कहीं रुकता नहीं ये वक़्त कहीं ठहरता नहीं मुझको शिकायत है उससे जो मेरा होकर भी होता नहीं। नदियों में गोते लगाती मछलियाँ हर आँगन को मैला करती नहीं यूँ ही बदनाम मत करो इन्हें ये हर किनारे तक पहुँचती नहीं। चारदीवारियों से झाँकने वाला हर कोई कैदी होता नहीं हम परContinue reading “अल्फ़ाज़ बड़े या ज़ुबाँ”