कभी-कभी

कभी-कभी तस्वीरें यादें बन जाती हैं तो कभी यादें ही तस्वीर बन जाती हैं कभी-कभी पराये अपने बन जाते हैं तो कभी अपने ही पराये हो जाते हैं कभी-कभी हम मुस्कुराकर पहचान बनाते हैं तो कभी मुस्कुराहट पर हँसते रह जाते हैं कभी-कभी बोलकर भी हकला जाते हैं तो कभी मौन होकर भी नहीं ठहरContinue reading “कभी-कभी”