ऐसा किया करना

मैं बेज़ुबान हो जाऊँ तो तुम मेरी आवाज़ हो जाना मैं गुमशुदा हो जाऊँ तो मेरे इंतज़ार में चौखट ज़रूर तकना नींद ना आए जब कभी तो मेरी हथेली को याद ज़रूर करना संघर्ष भरी है ज़िंदगी लेकिन वफ़ाई को हमेशा याद रखना शामें बहुत-सी आएँगी लेकिन सुबह मुलाकात का ज़िक्र ज़रूर करना हाथ छुड़ानाContinue reading “ऐसा किया करना”

और फ़िर भी तुम…

ज़रूरत होती है जब तुम्हारी तब पता नहीं क्यूँ तनहा कर जाया करते हो नम हैं मेरी आँखें अभी और तुम मुस्कुराहट देखना चाहते हो आज हर तरफ़ से नोचा जा रहा है मेरे दिल को खरोचा जा रहा है मेरे ज़ख्मों को और तुम हमें ज़िन्दा देखना चाहते हो बहला-फुसलाकर तो जिया करते हैंContinue reading “और फ़िर भी तुम…”

ईश्वरीय सत्ता अटल है

सुन्दर-सुन्दर वादियों में बैठे हो तुम जब पुकारो तुरन्त ही हाथ थामे साथ देने चले आते हो तुम मूरत तुम्हारी पर्वतों में सजी है लेकिन हमने दिल में उतार कागज़ों में सिमेट ली है कपि की भाँति मुख सजा है दिल चीरकर सियाराम को दिखाया है हस्त भुजाओं में गदाधारी ने धारण कर अपने बलContinue reading “ईश्वरीय सत्ता अटल है”

शान्ति

मैं शान्ति से कुछ अल्फ़ाज़ व्यक्त करना चाहती हूँ चीख़-चीखकर हार गई हूँ मेरी कमी में कमी ढूँढना आदत हो गई होगी तुम्हारी शायद इसीलिए मज़बूत होकर थक गई हूँ मैंने सारी हिचक को एक दुपट्टे में बाँधकर ओढ़ लिया है मैंने आजकल कल में होकर रहना छोड़ दिया है फ़िलहाल मेरी कहानियों को छोड़ोContinue reading “शान्ति”

तस्वीर से गुफ्तगू

चुप होकर भी मेरी ज़ुबाँ बोल उठी सोई तो किस्मत मैं क्यूँ नहीं उठी। ख़ामोशी से टँगी हुई हूँ इन पथरीली दीवारों पर पता नहीं क्यूँ ये शिकायत करते हैं न बोलने पर

अजीब कहानी-तेरी ऐ ज़िंदगानी

मेरा जीवन भी कभी हरा-भरा हुआ करता था।वक़्त बदलते ही ये भी पतझड़ हो गया। मायूस चेहरा कभी हँसते-हँसते दुखता था।आज वो भी दुःख में ही बहता है। माथा सिकोड़कर नाराज़गी बयाँ कर जाती थी।आज कोने में सिकुड़कर बैठी रहती हूँ।मैं भी कभी ख़ुद को कलाकार समझती थी।आज कठपुतली बन गई हूँ। मैंने कभी नहींContinue reading “अजीब कहानी-तेरी ऐ ज़िंदगानी”

मेरी मोहब्बत-फ़कीर

सड़क किनारे सोते देखा जब अपनी मोहब्बत को तब रोक नहीं पाया मैं अपने अश्कों को ढल गई थी उस लम्हें में मेरी सुबह जब उसका नाम पुकारते ही निकली थी दिल से आह पहला कदम बढ़ाया जैसे ही उसकी ओर मेरे भीतर होने लगा एक अजब-सा शोर छा रहा था अंधेरा एकदम घोर साँझContinue reading “मेरी मोहब्बत-फ़कीर”

मेरे दिल की कही

मजबूरियाँ घेर रही हैं तनहाईयाँ कुबूल रही हैं सब जाते जा रहे हैं हम जीते जा रहे हैं पलटती नहीं तक़दीर-ए-किताब कहानियाँ क्यूँ हमें ख़रीद रही हैं बहकाती हैं कई शामें लेकिन हमसे तो हकीकत ही रुबरू हो रही हैं घूमती हैं इधर-उधर नज़रें लेकिन धड़कनें तुम्हीं पर आकर रुक रही हैं नहीं कर सकतेContinue reading “मेरे दिल की कही”